चंदन-सागर अग्रहरि का सिंडिकेट उजागर, ऑडियो रिकॉर्डिंग व डायरी से खुली पोल।

विशेष संवाददाता, महराजगंज। ए.आर.टी.ओ. कार्यालय और सड़कों पर जारी अवैध वसूली के काले कारोबार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आमरुतिया बाजार (महराजगंज) निवासी चंदन अग्रहरि और उसका भाई सागर अग्रहरि अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आरटीओ अधिकारियों व ड्राइवरों की शह पर जिले में संगठित ‘एंट्री सिंडिकेट’ चला रहे हैं। हर महीने करोड़ों रुपये का यह खेल सड़क पर दौड़ते ओवरलोड ट्रकों, डीसीएम, पिकअप, ट्रैक्टर-ट्रॉली, बाहरी बसों और कंटेनरों से सरेआम वसूला जा रहा है।
सड़क सुरक्षा के नियमों को ठेंगा दिखाकर चलाए जा रहे इस वसूली नेटवर्क के ऐसे पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं, जिन्हें खारिज करना परिवहन विभाग के लिए नामुमकिन होगा। हस्तलिखित सूचियों से लेकर ऑडियो क्लिप और ऑनलाइन पेमेंट ट्रेल ने इस पूरे गिरोह की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। डायरी, ऑडियो और ऑनलाइन पेमेंट ट्रेल मामले में सबसे बड़ा सबूत चंदन अग्रहरि के हाथों से लिखी गई गाड़ियों की वही सूची है, जो चालान से बचाने के लिए तैयार की जाती थी। इस लिस्ट में दर्ज वाहनों पर आरटीओ की टीम चेकिंग के दौरान ओवरलोडिंग की कोई कार्रवाई नहीं करती थी। इसके अलावा, 7 जून को महराजगंज और गोरखपुर दोनों जिलों के लिए एंट्री के नाम पर ₹24,000 की राशि सागर अग्रहरि के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर की गई, जिसमें गाड़ियों के नंबर स्पष्ट दर्ज हैं।
वसूली का रेट भी गाड़ियों के हिसाब से तय किया गया है
बड़ी गाड़ियां व कंटेनर: ₹8,000 प्रति माह
डीसीएम/मध्यम वाहन: ₹6,000 प्रति माह
पिकअप/छोटे वाहन: ₹3,200 *प्रति माह वसूली की जाती हैं।
*साहब ओवरलोड में नहीं, दूसरे कागज में सीज कर रहे हैं’*
वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग में साफ सुना जा सकता है कि जब कोई गाड़ी गलती से पकड़ी जाती है, तो चंदन या सागर तुरंत आरटीओ या उनके ड्राइवर से बात करवाते हैं। कार्रवाई से बचने के लिए कागजी कोरम पूरा करने का बहाना बनाकर गाड़ी को ओवरलोड की जगह किसी मामूली कागजी कमी के नाम पर सीज दिखा दिया जाता है। तस्वीरों में यह भी देखा जा सकता है कि शाम को दफ्तर का ताला बंद होने के बाद अवैध वसूली की रकम और पासिंग लिस्ट को अंदर अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है।
पुराना रहा है विवादों से नाता।
यह पहला मौका नहीं है जब चंदन अग्रहरि का नाम इस तरह के मामलों में सामने आया है। कुशीनगर जिले में भी ठीक इसी तरह के वसूली रैकेट में चंदन का नाम उछला था। इसके अलावा, लगभग तीन वर्ष पूर्व मथुरा प्रसाद (P.T.O.) और प्रवर्तन सिपाही के जेल जाने वाले प्रकरण में भी चंदन अग्रहरि की सीधी संलिप्तता की चर्चा थी।
हालांकि, इस बार आरटीओ के सरकारी ड्राइवरों से रोजाना होने वाली बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग, हाथ से लिखी डायरी और बैंक ट्रेल जैसे पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के उच्च अधिकारी इस सिंडिकेट पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।

रुपेश वर्मा की रिपोर्ट

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