
महराजगंज। बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वाले एक बेहद शातिर और सुसंगठित आपराधिक गिरोह (गैंग) के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। महाराजगंज जिले के थाना निचलौल में इस अंतरराष्ट्रीय/अंतर्राज्यीय ठग गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम, 1986 (गैंगस्टर एक्ट) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर गैंग चार्ट को मंजूरी दे दी गई है।
यह कार्रवाई निचलौल के थानाध्यक्ष अंकित सिंह और उप-निरीक्षक अमित विश्वकर्मा की टीम द्वारा पर्याप्त सबूतों के आधार पर की गई है।
ऐसे जाल में फंसाते थे बेरोजगारों को:
पुलिस जांच और दर्ज मामले के अनुसार, यह गिरोह सीधे-साधे और जरूरतमंद युवाओं को नौकरी लगवाने का लालच देता था। इसके बदले उनसे मोटी रकम (लाखों रुपये) ऐंठी जाती थी। फर्जीवाड़ा इस हद तक था कि आरोपियों द्वारा फर्जी परीक्षा आयोजित कराई जाती थी, फर्जी ट्रेनिंग दी जाती थी और अंत में हूबहू असली दिखने वाला ‘फर्जी जॉइनिंग लेटर’ (नकली नियुक्ति पत्र) थमा दिया जाता था। जब पीड़ित युवाओं को ठगी का एहसास होता और वे अपने पैसे वापस मांगते, तो आरोपी उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां देते और जान से मारने की धमकी देते थे। जनता के बीच इस गिरोह का इतना खौफ था कि कोई भी इनके खिलाफ गवाही देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था।
गोरखपुर का ‘अजीत’ है गैंग लीडर, ये हैं गिरोह के सदस्य:
पुलिस द्वारा जारी की गई सूची के अनुसार, इस सुसंगठित गिरोह का संचालन गोरखपुर का एक शातिर अपराधी कर रहा था। गिरोह में शामिल मुख्य नाम इस प्रकार हैं:
राजचन्द उर्फ अजीत (गैंग लीडर): उम्र लगभग 28 वर्ष, निवासी- कोइली खाल, बड़हलगंज, जनपद गोरखपुर। यह इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड और लीडर है।
आमोद राठौर (सदस्य): उम्र लगभग 56 वर्ष, निवासी- जानकीपुरम, सीतापुर रोड, कमिश्नरेट लखनऊ।
कुलदीप प्रकाश (सदस्य): उम्र लगभग 35 वर्ष, निवासी- इन्दिरा नगर, कमिश्नरेट लखनऊ (मूल निवासी: नरेन्द्रनगर, उन्नाव)।
अराधना कुमारी (सदस्य): पत्नी कुलदीप प्रकाश, निवासी- इन्दिरा नगर, कमिश्नरेट लखनऊ (मूल निवासी: नरेन्द्रनगर, उन्नाव)।
मुकेश चौधरी (सदस्य): उम्र लगभग 40 वर्ष, निवासी- औराटार पकड़ीअहवा, निचलौल, जनपद महाराजगंज।
लगीं भारतीय न्याय संहिता (BNS) और गैंगस्टर एक्ट की गंभीर धाराएं:
इस गिरोह के खिलाफ पहले से ही स्थानीय थानों में धोखाधड़ी और धमकी (मु0अ0सं0 157/26 और 158/26) के तहत मामले दर्ज हैं। विवेचना में इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने के बाद अब पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2), 352, 351(3), 61(2)a, 61(2)b, 127(2) और गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत शिकंजा कसा है।
इस बड़े मामले की कमान उप-निरीक्षक (SI) रामचन्द्र को सौंपी गई है, जिन्हें जांच अधिकारी (I.O.) नियुक्त कर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई (जैसे संपत्ति कुर्की व गिरफ्तारी) के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस का कहना है कि समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने और ऐसे जालसाजों को जड़ से खत्म करने के लिए यह कार्रवाई बेहद जरूरी थी।
