पुलिसिया प्रताडना से परेशान पत्रकार सपरिवार करेगा आत्मदाह
पत्रकारों मे रोष व्याप्त


ठूठीबारी (महराजगंज): पुलिसिया उत्पीड़न और झूठे मुकदमों की धमकियों से तंग आकर ठूठीबारी व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार दिनेश रौनियार ने जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के खिलाफ निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। पूर्व में मिले प्रशासनिक आश्वासन के पूरा न होने पर उन्होंने 7 सितंबर की शाम तक आरोपियों पर कार्रवाई न होने की स्थिति में ठूठीबारी थाना गेट पर आत्मदाह करने की अंतिम चेतावनी (अल्टीमेटम) दी है।
आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला।
ग्राम ठूठीबारी निवासी पीड़ित दिनेश रौनियार (पुत्र रामछबीला) के अनुसार, बीते 2 सितंबर 2026 की दोपहर ठूठीबारी कोतवाली प्रभारी अमित कुमार सिंह के शह पर दरोगा अनूप तिवारी और चार सिपाहियों ने उनके घर में जबरन घुसकर बदसलूकी व गाली-गलौज की। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों ने उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी। पुलिस की इस दबंगई और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ 4 सितंबर की सुबह 11 बजे दिनेश रौनियार ठूठीबारी दुर्गा मंदिर के समीप अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठ गए थे। हालांकि, क्षेत्राधिकारी निचलौल रवींद्र कुमार सिंह द्वारा आरोपी थानेदार अमित कुमार सिंह, दरोगा अनूप तिवारी और चारों कांस्टेबलों पर सख्त विधिक कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद उन्होंने अनशन स्थगित कर दिया था।
24 घंटे में कार्रवाई नहीं तो आत्मदाह।
प्रशासनिक आश्वासन के बाद भी जब आरोपी पुलिसकर्मियों पर कोई कदम नहीं उठाया गया, तो 6 सितंबर को दोपहर 12:30 बजे दिनेश रौनियार ने क्षेत्राधिकारी को लिखित रूप से चेतावनी पत्र सौंपा।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि सोमवार (7 सितंबर 2026) की शाम तक आरोपी पुलिसकर्मियों पर कठोर विधिक व अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वह ठूठीबारी थाना परिसर के मुख्य द्वार पर आत्मदाह करने के लिए विवश होंगे।
जिला प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल।
इस पूरे घटनाक्रम ने महराजगंज के जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में अपराध और पुलिसिया भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही जाती है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन लिखित आश्वासन देकर भी आरोपी पुलिसकर्मियों का बचाव करता नजर आ रहा है। पत्रकार व व्यापार मंडल अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार नागरिक के साथ घर में घुसकर हुई अभद्रता पर जिले के उच्चाधिकारियों का मौन रहना प्रशासनिक शिथिलता को दर्शाता है। अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन इस चेतावनी के बाद हरकत में आता है या किसी बड़ी अप्रिय घटना का इंतजार करता है।
