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रायबरेली में है छुट्टा जानवरों का आतंक,किसान परेशान, जिले में नहीं है जानवर पकड़ने का कोई संसाधन, ठंड में किसान बने चौकीदार

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सन्दीप मिश्रा
ब्यूरो

रायबरेली उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गोवंश को सुरक्षित रखने के अपने अथक प्रयास कर डालें परंतु आज ना तो गोवंश से सुरक्षित हैं और ना ही उनके आतंक से किसान ही अपने आप को सुरक्षित मान रहे । भीषण ठंड के मौसम में भी उन्हें अपने खेतों की सुरक्षा के लिए रात भर चौकीदारी करनी पड़ती है और यह हाल तब है जब प्रदेश सरकार लगातार गौशालाओं और गोवंश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्त्र दांव पर लगा रही है । कहा जा सकता है कि प्रदेश सरकार के आदेश केवल कागजों पर घूम रहे हैं । क्योंकि आज भी किसान अपनी फसल को नष्ट होते खुद अपनी आंखों से देख रहा है। लेकिन शिकायत के नाम पर कहां गुहार लगाए यह उसकी आंखों से छलकते आंसू बता सकते हैं। गुरबख्श गंज क्षेत्र में तो जानवरों का आतंक इस तरह है कि किसान कई बार में सरकारी भवनों में बंद भी करा चुके हैं। लेकिन उसके बाद भी आज हालात जस के तस हैं प्रदेश सरकार गोवंश और छुट्टा जानवरों पर लगाता जिले के अधिकारियों को दिशा निर्देश जारी कर रही है यहां तक कह रही है कि शिकायत मिलने पर उच्च अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी । परंतु जनपद में देखा जाए तो शहर से लेकर गांव तक में छुट्टा जानवरों का आतंक मचा हुआ है और इन से हो रहे नुकसान की भरपाई चलने के लिए कोई भी सरकारी अमला सामने नहीं दिखाई देता है। सबसे ज्यादा शर्म की बात तो यह है कि एक ओर सरकार किसानों से कहती है कि उन्हें छुट्टा जानवरों की समस्याओं से निजात दिलाई जाएगी । दूसरी तरफ जिले में एक भी जानवरों को पकड़ने के लिए वाहन नहीं है। पशुपालन विभाग निजी संसाधनों से किसी तरह किसी को खुश करने के लिए जानवरों को इधर-उधर भले ही कर देता हो। लेकिन उस रहनुमा के जाते ही किसानों पर छुट्टा जानवरों का कहर फिर से बरस पड़ता है और जानवरों को पकड़ने के लिए वाहन ना होने के कारण यदि कोई जानवर बीमार भी हो जाता है तो पशुपालन विभाग अपने आप को दया और दिशाहीन बताता है। क्योंकि उसका कहना है कि जानवर या तो अस्पताल आए तब उसका इलाज हो सकता है या अस्पताल कर्मी खुद जानवर के पास जाए तब इलाज संभव है लेकिन इन जानवरों को अस्पताल लाने की जहमत कौन विभाग उठाएं। यह अभी तक बता पाने में ना तो पशुपालन विभाग ही सक्षम दिखाई देता है और ना ही छुट्टा जानवरों के नाम पर आ रहे धन का उपयोग करने वाले विभाग ही बताते हैं।

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