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खुलेआम हो रही है स्टाम्प पेपरों की कालाबाजारी, क्या रुक सकेगा अंकित मूल्यों से ज्यादा के दाम पर स्टाम्पों का बिकना

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सन्दीप मिश्रा

रायबरेली । स्टांप चोरी के नाम पर सरकार या तो आरोपियों को जेल भेज रही है या फिर उनको नोटिस भेजकर सरकार स्टांप चोर घोषित कर रही है। लेकिन तमाम स्टांप विक्रेताओं की दुकानों पर स्टाम्प पेपर महंगे दामों पर बेचे जाते हैं उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती है। प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय के सामने ही स्टांप विक्रेता स्टांप पेपरों पर अंकित मूल्यों से ज्यादा के स्टांप पेपर बेचते हैं और विभाग के किसी भी अधिकारी को इसकी खबर नहीं हो पाती है यह हाल कोई एक जिले, तहसील का नहीं है । अमूमन पूरे प्रदेश में सदियों से स्टांप पेपर महंगे दामों पर बेचे और खरीदे जा रहे हैं और सरकारी इस भ्रष्टाचार पर आंख मूंदे बैठी रही भाजपा सरकार आई तो लोगों को उम्मीद जगी कि शायद स्टांप की कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी लेकिन तमाम तहसीलों में महंगे दामों पर स्टांप आज भी बेचे जाते हैं। आश्चर्यजनक रूप से स्टांप पेपरो से अमूमन हर अधिकारियों को दो-चार होना ही पड़ता है और उसे भी पता होता है कि इसमें लगा ₹100 का स्टांप पेपर आवेदक को अवश्य ही 110 या 150 के बीच में मिला होगा कितने पर भी कोई कार्यवाही अधिकारियों द्वारा नहीं होती है। इसका कारण आज तक जनता की समझ में नहीं आया । बताते है कि स्टांप विक्रेताओं को निकासी के दौरान कमीशन भी मिलता है । जो सरकार इन विक्रेताओं को देती है। इस पर भी तहसील परिसर में स्टांप पेपर विक्रेता आम लोगों से 10 रुपये के स्टांप पेपर को 20 रुपये में बेच रहे हैं। इस बारे में लोग कई बार अधिकारियों से शिकायत भी कर चुके हैं। बावजूद इसके उनमें कोई सुधार नहीं हो रहा है। ये स्टांप पेपर पर कई गुना लाभ कमा रहे हैं। तहसीलों में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार ने ई-स्टाप प्रणाली शुरू की थी। तब स्टांप पेपर विक्रेताओं ने ई-स्टांपिग का विरोध किया था। स्टांप पेपर विक्रेताओं ने कहा था कि उन्हें जो तीन फीसद स्टांप पेपर बेचने पर कमीशन मिलता था, सरकार ने उसे बंद कर दिया है। अब तो आम आदमी ई-स्टाम्प ले लेता है। सरकार ने स्टांप पेपर विक्रेताओं की बात मानते हुए 10 से 100 रुपये तक के ई-स्टाम्प को बंद कर दिया और स्टांप पेपर विक्रेताओं को ही स्टांप पेपर बेचने का अधिकार दे दिया, ताकि स्टांप पेपर विक्रेता अपना 3 फीसद कमीशन लेकर अपने परिवारों का गुजारा करते रहें। अब स्टांप पेपर विक्रेता सभी स्टांप पेपरों को कीमत से ज्यादा में बेच रहे हैं। 10 रुपये के स्टांप पेपर को 20 रुपये में देते हैं, क्योंकि इसका सबसे ज्यादा उपयोग शपथ पत्र बनवाने में होता है। वैसे ये 100 रुपये के स्टांप पेपर को 130 रुपये में बेचते हैं। स्टांप पेपर विक्रेता इस तरह से तहसील परिसर में आम आदमी से लूट कर रहे हैं। इस तरह की शिकायत पहले भी प्रशासन के सामने आ चुकी हैं। हर बार चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है।

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