भारतीय ध्वज के साथ निकला महराजगंज का ताज़िया ,याद किये गए हसन और हुसैन।

महराजगंज ब्यूरो

भानु प्रताप तिवारी की रिपोर्ट

मुहर्रम इस्लामी वर्ष यानी हिजरी सन्‌ का पहला महीना है। हिजरी सन्‌ का आगाज इसी महीने से होता है। इस माह को इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शुमार किया जाता है। अल्लाह के रसूल हजरत [[मुहम्मदصلی اللہ علیہ و آلہ و سلم] ने इस मास को अल्लाह का महीना कहा है। साथ ही इस मास में रोजा रखने की खास अहमियत बयान की है।मुख्तलिफ हदीसों, यानी हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के कौल (कथन) व अमल (कर्म) से मुहर्रम की पवित्रता व इसकी अहमियत का पता चलता है। ऐसे ही हजरत [[मुहम्मदصلی اللہ علیہ و آلہ و سلم] ने एक बार मुहर्रम का जिक्र करते हुए इसे अल्लाह का महीना कहा। इसे जिन चार पवित्र महीनों में रखा गया है, उनमें से दो महीने मुहर्रम से पहले आते हैं। यह दो मास हैं जीकादा व जिलहिज्ज।एक हदीस के अनुसार अल्लाह के रसूल हजरत [[मुहम्मदصلی اللہ علیہ و آلہ و سلم] ने कहा कि रमजान के अलावा सबसे उत्तम रोजे वे हैं, जो अल्लाह के महीने यानी मुहर्रम में रखे जाते हैं। यह कहते समय नबी-ए-करीम हजरत [[मुहम्मदصلی اللہ علیہ و آلہ و سلم] ने एक बात और जोड़ी कि जिस तरह अनिवार्य नमाजों के बाद सबसे अहम नमाज तहज्जुद की है, उसी तरह रमजान के रोजों के बाद सबसे उत्तम रोजे मुहर्रम के हैं। इस्लामी यानी हिजरी सन्‌ का पहला महीना मुहर्रम है। इत्तिफाक की बात है कि आज मुहर्रम का यह पहलू आमजन की नजरों से ओझल है और इस माह में अल्लाह की इबादत करनी चाहीये जबकि पैगंबरे-इस्लाम ने इस माह में खूब रोजे रखे और अपने साथियों का ध्यान भी इस तरफ आकर्षित किया। इस बारे में कई प्रामाणिक हदीसें मौजूद हैं। मुहर्रम की 9 तारीख को जाने वाली इबादतों का भी बड़ा सवाब बताया गया है। हजरत मुहम्मद صلی اللہ علیہ و آلہ و سلم के साथी इब्ने अब्बास के मुताबिक हजरत [[मुहम्मदصلی اللہ علیہ و آلہ و سلم] ने कहा कि जिसने मुहर्रम की 9 तारीख का रोजा रखा, उसके दो साल के गुनाह माफ हो जाते हैं तथा मुहर्रम के एक रोजे का सवाब (फल) 30 रोजों के बराबर मिलता है। गोया यह कि मुहर्रम के महीने में खूब रोजे रखे जाने चाहिए। यह रोजे अनिवार्य यानी जरूरी नहीं हैं, लेकिन मुहर्रम के रोजों का बहुत सवाब है।
आज दिनांक 10 सितम्बर 2019 को मोहर्रम के मेले में एक अलग ही जोश देखा गया जहां इस्लाम के जाबांजो को याद किया गया वही देश से प्रेम का अलग ही अंदाज देखने को मिला गाजे बाजे के साथ और ढोल नगाड़ों के साथ ताज़िया का इस्तकबाल किया गया वही भारतीय ध्वज को ससम्मान तरीके से हवाओं में लहरा कर अपने देश और अपने धर्म के प्रति महराजगंज जनपद के मुश्लिम भाइयों में प्यार देखने को मिला, आज महराजगंज जनपद में आज मोहर्रम के महीने में मुश्लिम भाइयों के साथ हिन्दू भाइयों में एकता का अलग ही संदेश देने का कार्य किया ये हिंदुस्तान ही एक ऐसा राष्ट्र है जहां हिन्दू मुश्लिम सिख ईसाई हम सब भाई भाई है ऐसे स्लोगन के साथ बदलते हिंदुस्तान का निर्माण हो रहा है ।
आपको बताते चले कि जिस तरह हसन और हुसैन को उनकी बहादुरी पर पूरा विश्व उनके शौर्य की गाथा गाता है उसी तरह आज महराजगंज जनपद उत्तर प्रदेश में आज देखने को मिला मोहर्रम के त्योहार को सब धर्म के लोग एकता पूर्ण तरीके से मनाते है।

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