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वादों की ठगी का शिकार है युवा,देश नही बिकने दूंगा” का अर्थ निजीकरण कतई नही-आशीष द्विवेदी

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रिपोर्ट-सन्दीप मिश्रा

उ0प्र0 उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष एवं शहर कांग्रेस महासचिव आशीष द्विवेदी ने वर्तमान देश-प्रदेश की सरकार द्वारा किये जा रहे जनविरोधी कार्यों के परिणाम स्वरूप देश मे बढ़ती बेरोजगारी, मंदी, भ्रष्टाचार, लूट-हत्या आदि से उपजे हालातों पर विचार व्यक्त करते हुवे कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को पंद्रह लाख देने के जुमले से शुरू हुवा केंद्र सरकार का सफर नोटबन्दी से तालाबंदी तक आम जनमानस के लिए पीड़ादायी रहा।
उन्होंने कहा कि सरकार की अदूरदर्शिता के परिणाम स्वरूप देश का किसान आवारा पशुवों व खेती के लिए जरूरी सिचाई एवं यूरिया की किल्लत से जूझता दिन काट रहा है किंतु जिम्मेदारों की नज़र किसानों की बदत्तर होते हालातों पर नही टिकती। उन्होंने कहा कि व्यापारी वैश्विक मंदी के संक्रमण काल से गुजर रहा है जिसमे बढ़ते करों के बोझ, जीएसटी  एवं व्यापार विरोधी नीतियों ने मंझोले एवं मध्यम वर्गीय व्यापारी की कमर तोड़ने के साथ ही समूचे व्यापार जगत को अपूर्णीय छति प्रदान की है। देश-प्रदेश में एक दल एवं विचारधारा की सरकार होने के बावजूद दोनों सरकारों द्वारा व्यापारियों के प्रति अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे जिसका ताजा-तरीन उदाहरण केंद्र सरकार द्वारा मंडी शुल्क समाप्त कर दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा उसे लागू रखना है जिसका खामियाजा वृहद स्तर पर अढ़ाती एवं गल्ला व्यापारी भोगने को बाध्य है।
श्री द्विवेदी ने रोजगार एवं शिक्षा पर सरकार के रवैये पर प्रश्न उठाते हुवे कहा कि दो करोड़ प्रतिवर्ष रोजगार देने का वादा करने वाली केंद्र सरकार पिछले छः वर्षों में लगभग चौदह करोड़ रोजगार छीन चुकी है, सरकार की मंशा के अनुरूप शिक्षित युवा वैश्विक महामारी काल मे पकौड़े भी नही तल पा रहा है। ऐसे में अवसाद का शिकार देश की युवा पीढ़ी अनिश्चित भविष्य की राह में किस ओर पलायन करेगी, यक्ष प्रश्न है? उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते भारत के गौरवशाली संस्थानों का निजीकरण देश को पुनः पराधीनता की ओर ले जाएगा। "देश नही बिकने दूंगा"  के संकल्प का अर्थ निजीकरण कतई नही होता।

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